अशोक भाटिया
राजघरानों, कम्युनिस्टों और पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के आस-पास घूमने वाली सरकार अब एक युवा नेता क्चड्डद्यद्गठ्ठ स्द्धड्डद्ध के हाथों में जा रही है। काठमांडू के मेयर के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी क्रस्क्क आम चुनाव परिणाम में भारी बढ़त के साथ नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर रही है। अब तक प्राप्त समाचारों के अनुसार 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में प्रत्यक्ष मतदान वाली 165 सीटों की गिनती में आरएसपी ने जबरदस्त बढ़त हासिल कर ली है। शुक्रवार देर रात तक पार्टी लगभग 115 सीटों पर आगे चल रही थी। इस स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है। यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
बताया जाता है कि त्रद्गठ्ठर्-ं प्रदर्शन, करप्शन के खिलाफ गुस्सा और सोशल मीडिया की ताकत ने नेपाल में एंटी-इनकम्बेंसी को जन्म दिया। लेकिन नए नेता क्चड्डद्यद्गठ्ठ स्द्धड्डद्ध ने देश की सत्ता में शीर्ष तक पहुंचने की यह यात्रा इतनी तेजी से कैसे तय की? पुराने नेता क्यों चूक गए? और सबसे बड़ा सवाल इस नई, युवा और मुखर लीडरशिप के आने से भारत-नेपाल संबंधों पर क्या असर पड़ेगा? इन तमाम ज्वलंत मुद्दों और नेपाल की सियासत के बदलते समीकरणों को समझने के लिए मीडिया ने साउथ एशिया मामलों के एक्सपर्ट से बात की, जिसमें उन्होंने बेहद तार्किक ढंग से समझाया है कि नेपाल की सत्ता में कोई भी आए, लेकिन अर्थव्यवस्था और रेमिटेंस जैसी जरूरतों के चलते वह चाहकर भी भारत के रोल को नजरअंदाज नहीं कर सकता।बालेन शाह का उभरना और आज की जो कंटेंपरेरी वर्ल्ड पॉलिटिक्स है, जिसमें हम कहते हैं कि टेक्नोलॉजी का रेवोल्यूशन बहुत तगड़ा रोल प्ले करता है; तो बालेन शाह की पूरी कैरेक्टरिस्टिक्स वैसी ही हैं। अभी वो सिर्फ 35 साल के हैं, लेकिन पब्लिक लाइफ में उनका आना 2013 में हुआ था, जब उन्होंने अपना रैप किया था। वैसे तो बहुत लोग रैप करते हैं, लेकिन रैप की जो अपनी हिस्ट्री है कि रैप इसी ट्रेडिशन में आया ही था कि मेनस्ट्रीम के अगेंस्ट जाकर करप्शन और बाकी सारी चीजों के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
नेपाल में इस चुनावी उलटफेर के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से जनता की नाराजगी, युवा मतदाताओं का पुराने नेताओं से मोहभंग और बालेन शाह द्वारा नई राजनीति और बदलाव का वादा। नेपाल में कुल लगभग 1 करोड़ 89 लाख मतदाता हैं और 275 सीटों के लिए मतदान हुआ है। प्रत्यक्ष मतदान की 165 सीटों में आरएसपी को दो-तिहाई बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। इसके अलावा समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की 110 सीटों की गिनती अभी जारी है। रुझानों के आधार पर माना जा रहा है कि आरएसपी को वहां भी 50 से अधिक सीटें मिल सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो नेपाल के इतिहास में करीब 36 साल बाद किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत ही नहीं बल्कि प्रचंड बहुमत भी मिलेगा। इससे देश में राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है और नई सरकार से लोगों की अपेक्षाएं भी काफी ज्यादा हो गई हैं।
गौरतलब है कि नेपाली राजनीति में राजघराने का एक इम्पैक्ट रहता है। लेकिन अगर हम आइडियोलॉजी वाइज देखें, तो जो सेंट्रिस्ट पार्टियां हैं, जैसे नेपाली कांग्रेस है, उनका एक धड़ा मतलब एक तरह से ऐसी पार्टी है जो सेंट्रिस्ट पार्टी कहलाती है, जिनकी लिबरल पॉलिसीज के बारे में हम समझते हैं। दूसरी तरफ, माओवादी और कम्युनिस्ट पार्टियां मिलकर हैं, जिन्हें ओली या प्रचंड लीड करते हैं। तो नेपाल में एक तरफ हमारे पास ऐसी पार्टियां थीं जिन्हें आप जनरलाइज करने के लिए वामपंथी कह लें, और दूसरी तरफ सेंट्रिस्ट-राइट पार्टियां थीं।
उन्होंने कहा, अब बालेन शाह की जो पार्टी है, क्रस्क्क, वह भी एक सेंट्रिस्ट पार्टी है। तो इसका मतलब ये है कि वे नेशनलिस्ट होंगे, लेकिन ग्लोबलाइजेशन के साथ जाएंगे और लिबरल पॉलिसीज के साथ जाएंगे। इसका मतलब ये भी है कि वे फॉरेन पॉलिसी में कोऑपरेशन और कम्पटीशन को जरूर प्रेफर करेंगे। तो जैसे नेपाली कांग्रेस के समय पर अमूमन चीजें रहती हैं, मैं ऐसा समझता हूं कि चुनाव जीतकर अगर क्रस्क्क पार्टी सत्ता में आती है, या अगर गठबंधन भी होता है, तो भी लीडरशिप उनकी ही होनी चाहिए। मेरे ख्याल से बाकी सारी चीजों में उनकी लिबरल पॉलिसीज ही होंगी। एक्सपर्ट कहते है कि दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी पहली या दूसरी बार सरकार में आई थी, तो जिस तरह का रिटोरिक चलता था और जैसा सोशल मीडिया-पब्लिक सपोर्ट था यानी एक नए तरह की राजनीति करने की जो कोशिश थी, वह बालेन शाह के साथ भी जरूर जाएगी। एक्सपर्ट के अनुसार , नेपाल की राजनीति में अगर आप पिछले 11-15 साल में देखें तो करीब 13-14 से ज्यादा सरकारें आ चुकी हैं। और जब त्रद्गठ्र्ठं प्रोटेस्ट हुआ, तो उस प्रोटेस्ट की वजह से जो सरकार गिरी, वह एक तरह से चुनी हुई सरकार थी; उसके पास भारी मेजॉरिटी थी। वह एक गठबंधन सरकार थी। वहां वामपंथी सरकार को नेपाली कांग्रेस का सपोर्ट भी था। फिर करप्शन का पूरा मुद्दा बनाया गया और सोशल मीडिया पर बैन जैसी चीजें भी हुईं।किसी भी देश में, और हम नेपाल की बात तो करेंगे ही, वहां भी यूथ का जो रोल है, खासकर आज का इंटरकनेक्टेड यूथ, जो सिर्फ अपने देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि सोशल मीडिया की वजह से पूरी दुनिया से कनेक्ट होता है। दुनिया में क्या चल रहा है और आगे क्या आकांक्षाएं हैं, उनके साथ यूथ बहुत कनेक्ट होता है; उसकी अपनी भी एस्पिरेशन्स होती हैं। एक्सपर्ट बोले कि मुझे ऐसा लगता है कि बालेन शाह की उम्र, उनका काम और उनका बैकग्राउंड यूथ को बहुत अपील करता है, और जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद से तो उनका रोल बहुत ही इंपॉर्टेंट हो गया है। अगर बालेन शाह आगे बढ़कर पीएम बनते हैं, जैसा कि लग रहा है कि ऐसा हो सकता है, तो दुनिया में इसके और भी एग्जांपल हैं। जैसे जेलेंस्की हैं और एक-दो लोग और भी हैं, जिन्होंने अच्छे और इम्पैक्टफुल काम किए भी हैं।