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दिल्ली सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिल सके: शिक्षा मंत्रीआम आदमी पार्टी के समय 2024 – 25 में 240084 आवेदन आये थे जिसमे 1 लाख से ज्यादा आवेदन डुप्लीकेट और फर्जी थे: श्री सूद
दिल्ली,०६ अप्रैल २६ (आईडब्ल्युएनए)। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आज पुराना सचिवालय में शिक्षा निदेशालय द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए निजी गैर-सहायता मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश स्तर (नर्सरी/केजी/कक्षा 1) पर ईडब्ल्यूएस/डीजी एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की श्रेणियों के अंतर्गत प्रवेश हेतु कंप्यूटरीकृत ड्रॉ ऑफ़ लॉट्स की शुरुआत कर अपने सामने सभी श्रेणियों के ड्रा निकलवाये। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों एवं अन्य संबंधित पक्षों की उपस्थिति में यह ड्रा संपन्न कराया गया।
कंप्यूटरीकृत ड्रा के बाद शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने बताया की दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि दिल्ली के प्रत्येक पात्र बच्चे को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिले। उन्होंने आगे कहा की इस वर्ष इन सब श्रेणियों में प्रवेश के लिए तकनीकी सुधारों, NIC द्वारा विकसित और स्वीकृत सॉफ्टवेयर और आधार आधारित सत्यापन ( Encrypted Aadhaar Seeding) के माध्यम से डुप्लीकेट एवं त्रुटिपूर्ण आवेदनों पर प्रभावी रोक लगाई गई है। इससे वास्तविक लाभार्थियों को प्रवेश के अधिक अवसर प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा इस वर्ष कुल सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इसके साथ ही आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं पारदर्शी भी बनाया गया है। इस वर्ष 2025–26 की तुलना में कुल स्कूलों की संख्या 2219 से बढ़कर 2308 हो गई है। EWS/DG श्रेणी के अंतर्गत सीटें 44,045 से बढ़कर 48,092 हो गई हैं, जबकि CWSN श्रेणी में सीटें 6,471 से बढ़कर 7,609 तक पहुंची हैं। इस प्रकार इस वर्ष कुल सीटों की संख्या 50,516 से बढ़कर 55,701 हो गई है, जो कि 5,185 सीटों की वृद्धि को दर्शाता है।

श्री सूद ने आगे कहा की दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को इस वर्ष कुल 1,39,524 आवेदन प्राप्त हुए। EWS/DG श्रेणी में पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदनों की संख्या 1,38,536 है। वहीं, दूसरी ओर CWSN श्रेणी में पूर्ण आवेदनों की संख्या 904 से बढ़कर 988 हो गई है। श्री सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रा होने के बाद एक बार परिणाम फ्रीज होने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती गई हैं।
श्री सूद ने कहा की इस बार ड्रॉ पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से, पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से आयोजित किया गया है। विशेष बात यह रही कि अभिभावकों ने स्वयं ड्रा निकाला, जिससे प्रक्रिया पर उनका विश्वास और भी मजबूत हुआ है। हमें पूरा विश्वास है कि दिल्ली सरकार की सभी योजनाएं अब और अधिक पारदर्शी तरीके से जनता तक पहुंच रही हैं।
शिक्षा मंत्री ने आगे बताया की ड्रा के तुरंत बाद ही बच्चों को स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं। पिछले वर्ष से हमने प्रक्रिया में सुधार किया है। अब अभिभावकों के दस्तावेज़ मोबाइल पर ही सत्यापित कर लिए जाते हैं, जिससे उन्हें बार-बार स्कूलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। अगले तीन दिनों के भीतर आगे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, ताकि चयनित छात्रों को बिना किसी परेशानी के प्रवेश मिल सके।
शिक्षा मंत्री ने आगे बताया की इस ड्रॉ के माध्यम से हजारों बच्चों को प्रवेश का अवसर मिलेगा जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दिल्ली सरकार की चयन प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट-आधारित है। साथ ही ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभिभावकों को उनका उचित अधिकार मिल सके और प्रत्येक पात्र बच्चे को समान अवसर प्राप्त हो।

श्री सूद ने स्पष्ट किया की दिल्ली सरकार दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता, पारदर्शी चयन और समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह प्रवेश प्रक्रिया उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्री सूद ने यह भी बताया कि वर्ष 2024–25 में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान ईडब्ल्यूएस/डीजी/सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी में प्रवेश प्रक्रिया के लिए कुल 2,40,084 आवेदन प्राप्त हुए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय बड़ी संख्या में आवेदनों में डुप्लीकेसी थी। एक लाख से अधिक आवेदन मल्टीपल/डुप्लीकेट एंट्री के रूप में पाए गए, जो कि वास्तविक (genuine) आवेदनों की तुलना में लगभग 75% अतिरिक्त थे।
उन्होंने यह भी कहा कि अब दिल्ली की शिक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। दिल्ली सरकार द्वारा खोले गए सी एम श्री स्कूलों में बच्चों के प्रवेश लेने से भी इन सभी श्रेणियों के आवेदकों की संख्या में कमी आई है। यह इस बात का संकेत है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, जिसके कारण अभिभावकों का विश्वास सरकारी स्कूलों में बढ़ा है।(आईडब्ल्युएनए)।