सौरभ वार्ष्णेय
देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले सैनिकों के सामने सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक रोजगार की चुनौती लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। विशेष रूप से अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों के चार वर्ष की सेवा के बाद भविष्य को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में हाल ही में भारतीय सेना और भारतीय रेल द्वारा शुरू की गई नई पहल इन चिंताओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वहीं रेलवे और सेना के बीच यह सहयोग ढांचा से अब रिटायर सैनिकों को तुरंत रोजगार मिल खाली पदों को जल्द भरा जा सके गा। सरकार की इसे अच्छी पहल माना जा रहा है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, देश के 70 रेलवे डिवीजनों में से 9 डिवीजनों ने अब तक सेना के साथ समझौते किए हैं, ताकि पूर्व सैनिकों को ‘पॉइंट्समैनÓ के रूप में काम पर रखा जा सके। पॉइंट्समैन वह कर्मचारी होते हैं जो रेलवे ट्रैक के स्विच ऑपरेट करते हैं और ट्रेनों को एक लाइन से दूसरी लाइन में सुरक्षित तरीके से भेजते हैं। यह काम शंटिंग और यार्ड ऑपरेशन के लिए बहुत जरूरी है।
रेलवे और सेना ने मिलकर एक कोऑपरेशन फ्रेमवर्क शुरू किया है, जिसके तहत सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों और पूर्व अग्निवीरों को रेलवे में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस पहल का उद्देश्य सैन्य जीवन से नागरिक जीवन में संक्रमण को आसान बनाना और प्रशिक्षित युवाओं की क्षमताओं का उपयोग राष्ट्रीय विकास में करना है।
इस व्यवस्था के तहत रेलवे की विभिन्न श्रेणियों में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। लेवल-1 पदों में पूर्व सैनिकों के लिए 20 प्रतिशत और लेवल-2 तथा उससे ऊपर के पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण रखा गया है, जबकि पूर्व अग्निवीरों के लिए क्रमश: 10 प्रतिशत और 5 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है।
साथ ही रेलवे में खाली पदों को भरने के लिए लगभग 5000 से अधिक पूर्व सैनिकों को ‘प्वाइंट्समैनÓ जैसे पदों पर नियुक्त करने की योजना भी बनाई गई है। यह कदम न केवल बेरोजगारी की समस्या को कम करने में सहायक होगा बल्कि रेलवे जैसे विशाल तंत्र में अनुशासित और प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध कराएगा। वहीं पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली की सरकार ने भी अच्छा संकेत दे दिया है। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद अब दिल्ली पुलिस में आरक्षी के पद में 20त्न पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोमवार को दिल्ली पुलिस नियुक्ति व भर्ती नियम 1980 के नियम-9 में संशोधन को मंजूरी दे दी।
दरअसल, अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं में से केवल लगभग 25 प्रतिशत को ही स्थायी सेवा मिलती है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत युवाओं को चार वर्ष बाद नागरिक जीवन में लौटना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है।
सरकार ने इस दिशा में अन्य कदम भी उठाए हैं। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जा रही है, जिससे उनके लिए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते खुल सकें।
हालांकि, यह पहल स्वागत योग्य है, लेकिन इसे केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। निजी क्षेत्र, उद्योग और कौशल विकास संस्थानों को भी इस प्रक्रिया से जोडऩा आवश्यक है, ताकि सैनिकों के अनुभव और अनुशासन का लाभ देश के विभिन्न क्षेत्रों को मिल सके।
निस्संदेह, देश की सेवा करने वाले जवानों को सम्मानजनक भविष्य देना केवल नीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य है। यदि ऐसी पहलों को व्यापक और दीर्घकालिक रूप दिया जाए, तो यह न केवल पूर्व सैनिकों के जीवन को सुरक्षित बनाएगा बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
लेखक : वरिष्ठ पत्रकार व देशभर के समाचार पत्र पत्रिकाओं में राजनीतिक चिंतक विचारक है।
